तब की कंगाल आज संभाल रही करोडो,

 अपनी उतम कामनाको मन से लगाकर रखे,फिर देखे क्या होता है,

समीना खातुन 


      झारखंड गाव मे की एक गरीब ओर निराक्षर महिला ने ' जीवन ज्योती ग्रूप' नामक एक स्वयं सहायता समूह बनाकर इतिहास रच दिया है, आज जिसके बँक खाते की राशी है रू 2.41 करोड तक जा पहुची है.

यह समूह 20.000 महिलाओ वले ग्रुप का कर्यकपालो का प्रबंध करता है, ओर योजना बनते है, ताकी गरीब ओर जरुरतमंद महिला को छोटे छोटे लोन देकर उनकी मदत की जा सके.

बात थोडी पुरणी हे 1995 की, रांची के आस पास की कोई महिला पढी लिखी नाही थी, ना की घर का आय व्यव उनके हात मे राहता था ना की पैसे संभालने का अधिकार था,

पुरुष प्रभुत्व वाले समाज मे उनकी कोई आवाज नाही थी, ऐसे हालत मे समिना खातून संतुष्ट नाही थी, ओर ना तो इन सबको सहते रहणे को तयार थी, पौढ शिक्षा मे उसने पाढने लिखणे के साथ छोटी छोटी बचत के महत्व को जाना ,

इसे उसे एक नया विचार सुझा,क्या हुआ अगर महिलाओ की पोच पैसे तक नाही,लेकीन चावल तक तो है, 

महिला के छोटे समूह की प्रत्येक महिला ने एक एक कटोरा चावल डालकर एक पूल बनाया, ओर वह सारा  चावल स्थानीय साप्ताहिक बाजार मे बेच दिया इससे कुच पैसे हासिल हुये, जिससे उन्होंने कुच अन्य जरुरी वस्तू खरेदी ओर उन्हे भी लाभ कमाये बेचं दिया

 ये सिलसिला चलता रहा ओर साल के अंत तक 1 लाख तक पहुचा उसके बाद , उन्होंने ये पैसे जरुरतमंद सदस्य को 1 रू ब्याज पर देते और फिर नया व्यवसाय करते इससे अजा उनका इन्कम करोड तक है 


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