चिंता में डूबे हुए लोग जरूर पढ़े

 किसीने सच कहा है। कोई आपके हात का तो छीन सकता हे। लेकिन आपके किस्मत का नही,,,तो चलिए आपको एक कहानी के माध्यम से सुनता हु ,,,,



    एक राजा के दरबार में एक राजगुरु थे। वे राजदरबार में बेहद कम आते । क्यू की इनका एक स्कूल था जहा गांव के बच्चे को पढ़ाते 

 एक दिन राजगुरु राजा के पास गए तो वे बेहद चिंता में थे। तो गुरु ने चिंता का कारण पूछा तो।राजा ने कहा की राजकुमारी विवाह योग्य हो गई लकी उसे अबतक कोई वर नही मिल रहा है 
 
  तो गुरुजी ने कहा की में उसकी कुंडली देखता हु। जैसे ही कुंडली देखी तो गुरुजी ने कह इसका भाग्य बेहद अच्छा है। ये जिस व्यक्ति के साथ विवाह करेंगी वह राजा बन जायेगा जो राजा हे वे सम्राट बन जायेगा 

  यह सब देखकर गुरुजी के मन में बुरे विचार ने जन्म लिया। उन्हे लगा की वह खुद विवाह करके राजा बंजायेंगा।तो उसने राजा से कहा की इतनी आसानी से राजोकुमारी का विवाह नही होगा। ऐसा करेंगे तो आपको परिवार और जो शाही करेंगे उसका परिवार नष्ट हो जायेगा

  तो राजा ने कहा की इसका कोई उपाय बताएं । तो गुरुजी ने कहा की एक उपाय है । उसने लिए आपको राजकुमारी को एक बक्से में हीरे जवाहरात के सात नदी में बहाना है। और जो कोई भी व्यक्ति सामान्य क्यू न हो जिसको मिलेंगी उससे राजकुमारी को शादी करनी होगी।
   
    गुरुजी वहा से स्कूल गए और बच्चों से कहा की आज आपको को छुट्टी है।लेकिन मेरा एक काम करना होगा की। नदी में एक बक्सा बहता आयेगा वो लेकर आपको मेरे कक्ष में लाकर रख देना और दरवाजा बंद कर लेना।में कितना भी चलाऊ दरवाजा नही खोलना

  लेकिन जो किस्मत में लिखा है उसे कैसे बदलेगा कोई। उस नदी के किनारे एक दूसरे राज्य का राजकुमार शिकार के लिए आहे हुआ आराम कर रहा और हात पैर धो रहा था। तभी राजकुमार को एक बक्सा बहता हुआ नजर आया। तो उन्होंने सैनिक से बक्सा लानेको कहा और जब देखा तो एक सुंदर राजकुमारी थी

  राजकुमारी ने सारी कहानी बताते हुए कही की आपको मुझसे विवाह करना होगा 
 तो राजकुमार ने बक्से में अंगूठी लाई और पहनाकर शादी कर ली 
  
   उस बक्से में एक वस्तु रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया। तो आगे बच्चे बक्से का रास्ता देख रहे थे। बच्चों ने बक्सा लेकर गुरुजी के में कक्ष में रख बाहर से बंद कर दिया। तब गुरुजी ने जैसे ही बक्सा खोला तो उसमें से भालू बाहर आहे जो राजकुमार शिकार करके पकड़ा था

   लेकिन तब गुरु को समझ आए की किसी के किस्मत का हम नही छीन सकते और गुरुजी को भालू खा गया 

Moral of the story: यह कहानी हमे ये सिखाती हैं की चिंता करने से कुछ नही होता जो होना आहे वो होकर रहेगा धन्यवा

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