इंसान की उलझन बिजनेस करे या ना करे
दुःख या सुखा सब इंसान के हात है,,,,,,,
घर की जिमेदारी पूरी करते करते, व्यक्ति अपने सपने दबाता जाता है , ये सारा संसार मोहमाया है, यह कुछ भी स्थाई नहीं है,नौकरी हो या व्यवसाय,जब तक आप उससे प्रेम न करे तब तक , वह सिर्फ एक बोझ है
हा धन अर्जित अवश्य किया जायेगा , लेकिन जिस उद्देश से धन अर्जित किया वह कभी पूरा नहीं होगा , नही मन को शांति मिलेंगी ना भाग दौड़ भरे जीवन से मुक्ति
यह सबसे पहले आपके जीवन का लक्ष जानना होगा , इस पृथ्वी पर अनेक जीव जंतु है यह एक जाति मनुष्य की भी है,यदि वह भी केवल पशु पक्षी की तरह अपने शरीर की जरूरत के लिए नौकरी या व्यवसाय करे , तो उसे दुख ही प्राप्त होगा
मनुष्य को चाइए की वह अपने जीवन को सार्थक करे,दुनिया में एक से बढ़कर एक व्यापारी है,जिन्होंने अपने जीवन में अपार सफलता हासिल की है,लेकिन सफलता के मायने सब के लिए अलग अलग है
मनुष्य एक ऐसे प्राणी है,जो कल्पनाओं में अपना जीवन जीता है,पहले हम किसी व्यापार के बारे में सोचते है उसे स्टार्ट करते आहे,वही व्यापार हमारे लिए सिरदर्द बन जाता है
जो व्यापार हमारे कल्पना में पहले मनभावन लग रहा था,आज वही वेदना बन चुका है,इसके पीछे बेहद पड़ा रहस्य छुपा हुआ हे,आध्यात्मिक भाषा में उसे आत्मज्ञान कहा जाता है,सरल भाषा में कहे तो,दूसरे लोगो को ना देखकर किया गया बिजनेस
सकारात्मक सोच रखकर दूसरो के फायदे के हिसाब से किया गया बिजनेस आपको ज्यादा खुशी देता है, प्रत्यक मनुष्य की खोज अनंत है,लेकिन कोई भी इंसान उसे कुछ समय में पाना चाहता है जो असंभव है,एक बड़े विचार करके कोई भी बिजनेस शुरू करना चाहिए
तो वो आगे चलकर सफल होता आहे,
Moral of the story:
कोई भी लक्ष्य दूसरे को देखकर ना तय करे ,वह इंसान एक दिन में सफल नहीं होता धन्यवाद.....

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