किसीने बड़ी कमला कि बात कहीं हैं,जबतक सफलता नहीं मिलती हार नहीं मानना नही चाइए,
सफलता का संघर्ष जो लोग सफलता पाना चाते है, उने अंतिम पल तक हिंमत नही हारणी चाईये! जिस पल हम हार मान लेते है,उसी पल हम असफल हो जाते है, ये बात एक लोक कथा से समजेंगे..... पुराणे समय एक राजा एक युद्ध मे हार गाय था,उसके संभी सैनिक मारे जा चुके थ, राजा किसी तर अपणी जान बचाकर जंगल मैं भाग गया,सैनिक उसका पीचा कर रहे थे,राजा जान बाचाने के लिये एक गुफा मैं चला गया. सैनिक राजा को खोजते खोजतें गुफा तक पोहाच गये, सैनिक गुफा के अंदर राजा धूंड रहे थे ,लेकीन राजा नही मिला , सैनिक बाहर आकर गुफा को बडे बडे पथर से गुफा को बंद कर दिया. गुफा बेहत गेहरी थी, राजा अंदर ही चुपा था ,भूक से बेहाल ,बेहद थका हुआ था,राजा के शरीर मे ताकत नहीं थी, सैनिक गुफा बंद करके चले गये थे , राजा अंदर बैठे सोच रहा था की उसका जीवन अब खत्म हो गया. वह कभी बाहर नहीं निकल पायेंगा..... राजा निराश हो के बैठा था, तभी उसे आपनी मां की एक बात याद आयी की , कुच तो कर, यु ही मत मर,तो राजा के अंदर ऊर्जा आ गई!उसने सोचा की कोशिश किये बगेर हार नहीं मानना चाईए... राजा गुफा के द्वार से पत्थरों को हाटाने का काम शुरू कर दिया। ...